स्वतंत्रता दिवस से शुरू हुई पदयात्रा, घर-घर बांटी जा रही वन अधिकार अधिनियम 2006 की जानकारी

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लालकुआं: उत्तराखंड के बहुचर्चित बिंदुखत्ता क्षेत्र को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब तीव्र गति पकड़ चुका है। स्वतंत्रता दिवस पर आरंभ हुई यह ऐतिहासिक पदयात्रा अब ग्रामीण अंचलों के घर-घर पहुंचकर लोगों को जागरूक किया गया। भारी बरसात और प्रतिकूल मौसम भी स्थानीय जनता के हौसलों को डिगा नहीं पाया है, और महिलाओं तथा पुरुषों ने बढ़-चढ़कर इस आंदोलन में अपनी सहभागिता दर्ज कराई है।

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​आंदोलन प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 11 बजे तक पदयात्रा निकाली जा रही है, जिसमें वन अधिकार संगठन के कार्यकर्ता घर-घर जाकर ग्रामीणों को वन अधिकार अधिनियम 2006 की बारीकियों और उसके प्रावधानों की जानकारी दी। इस दौरान प्रचार टोली मौके पर ही लोगों के बयान दर्ज कर रहे हैं
हुड़का, तितूरी व अन्य कुमाऊं के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप के साथ पदयात्रा निकाली गई, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी। यात्रा का समापन स्थानीय मंदिरों के परिसरों में कर नुक्कड़ नाटकों और कीर्तन-भजनों के माध्यम से लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।

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​पदयात्रा के माध्यम से गांव-गांव जाकर आगामी 20 सितंबर को आयोजित होने वाली विशाल जनसभा और रैली के लिए क्षेत्रवासियों को आमंत्रित किया जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि यह जनसभा सरकार तक बिंदुखत्ता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी।
पदयात्रा और प्रचार अभियानों में मुख्य रूप से वन अधिकार संगठन, वन अधिकार समितियां, पूर्व सैनिक संगठन, विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता भारी संख्या में उपस्थित रहकर आंदोलन को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। स्थानीय जनता का यह उत्साह इस बात का गवाह है कि बिंदुखत्ता के बाशिंदे अपने हक और राजस्व गांव के अधिकार को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं।