दतिया धाम में सत्य साधक गुरुजी के दर्शन को लगा श्रद्धालुओं का तांता; सेवा और परोपकार का दिया संदेश

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देश के प्रतिष्ठित व्यापारी संतोष पुरोहित, मोहन साहनी, रिंकू यादव, रिंकू तिवारी और त्रिलोकीनाथ पांडा ने गुरुजी के दर्शन कर लिया आशीर्वाद, 17 नवंबर को हवन और 18 नवंबर को होगा विशाल भंडारा।

दतिया धाम। राम जानकी मंदिर, दतिया धाम में सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी की 36 दिवसीय निराहार साधना के दौरान श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। परिवार, समाज और जनकल्याण की मंगलकामना को लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुजी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। इस निराहार साधना में सतीश भी सहभागी हैं।
इसी क्रम में गुरुवार को प्रतिष्ठित व्यापारी संतोष पुरोहित, मोहन साहनी, रिंकू यादव, रिंकू तिवारी और त्रिलोकीनाथ पांडा ने दतिया धाम पहुंचकर गुरुजी के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान सभी ने गुरुजी से सन्मार्ग पर चलने तथा धर्म, अध्यात्म और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा ली।
इस अवसर पर गुरुजी ने मानव सेवा और गौ सेवा का संदेश देते हुए कहा कि मानव जीवन की सार्थकता केवल अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि दूसरों के दुख-दर्द को समझने और जरूरतमंदों के काम आने में है। समाज में असहाय, निर्धन, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य है। जो व्यक्ति किसी दुखी और परेशान इंसान के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करता है, वह वास्तव में ईश्वर की सेवा करता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
गुरुजी ने गौ सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गोवंश की सेवा, सुरक्षा और संरक्षण हम सभी का नैतिक एवं धार्मिक दायित्व है। बेसहारा और निराश्रित गायों को चारा, पानी और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना पुण्य का कार्य है। गायों के प्रति करुणा और संवेदना का भाव रखते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को गौ सेवा में अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, दया, करुणा, परोपकार और सद्कर्म ही सच्चे धर्म का आधार हैं।
गुरुजी ने सभी को प्रेरित किया कि जीवन में सदैव सत्य और सन्मार्ग का अनुसरण करें, अहंकार से दूर रहें तथा मानवता के कल्याण के लिए कार्य करें। असहाय व्यक्ति का सहारा बनना और बेजुबान जीवों की सेवा करना ही सच्ची आध्यात्मिकता है।
गुरुजी के इन प्रेरणादायी विचारों से श्रद्धालुओं ने मानव सेवा और गौ सेवा के कार्यों में अपनी सहभागिता निभाने का संकल्प लिया।
उल्लेखनीय है कि 17 नवंबर को निराहार साधना के समापन अवसर पर मंदिर परिसर में मां बगलामुखी महायज्ञ एवं हवन का आयोजन होगा, जबकि 18 नवंबर को विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा।