दशहरा पर्व पर सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी का संदेश—अहंकार, लोभ और अन्याय का त्याग कर अपनाएं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श
दतिया धाम। जय मां पीतांबरी साधना एवं दिव्य योग ट्रस्ट के संस्थापक सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी ने दशहरा पर्व पर समस्त भक्तजनों को शुभकामनाएं देते हुए सुख, शांति और धर्म के मार्ग पर चलने का आशीर्वाद दिया। अपने संदेश में गुरुजी ने दशहरे के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल रावण के पुतले के दहन का अवसर नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपी बुराइयों को पहचानकर उनका त्याग करने की प्रेरणा भी देता है।
गुरुजी ने कहा कि प्रत्येक वर्ष विजयदशमी पर रावण का पुतला जलाकर समाज बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का उत्सव मनाता है। लेकिन इस परंपरा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब मनुष्य अपने आचरण में भी भगवान श्रीराम के आदर्शों को उतारने का प्रयास करेगा। केवल रावण का पुतला जलाने से बुराइयों का अंत नहीं होता, बल्कि इसके लिए मनुष्य को अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों में सकारात्मक बदलाव लाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती अपने भीतर के रावण को पहचानने की है। ईर्ष्या, लोभ, अहंकार, असत्य और असहिष्णुता ऐसी बुराइयां हैं, जो व्यक्ति के विवेक को कमजोर करती हैं और समाज में वैमनस्य को बढ़ावा देती हैं। जब तक इन प्रवृत्तियों पर विजय नहीं पाई जाएगी, तब तक दशहरे का संदेश केवल उत्सव तक सीमित रह जाएगा।
सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, संयम, करुणा, सत्य और न्याय का आदर्श प्रस्तुत करता है। शक्ति के साथ विनम्रता, अधिकार के साथ कर्तव्य और सामर्थ्य के साथ धर्म का पालन ही रामत्व का वास्तविक स्वरूप है। आज समाज को ऐसे ही आदर्शों की आवश्यकता है, जिनके माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में नैतिकता और सदाचार को स्थान दे सके।

गुरुजी ने कहा कि राम और रावण के प्रतीक केवल धार्मिक कथाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में भी इन दोनों प्रवृत्तियों को देखा जा सकता है। परिवार, समाज, कार्यस्थल और सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति के विचार और कर्म ही उसके चरित्र की पहचान बनते हैं। असत्य और अहंकार कुछ समय के लिए सफलता का आभास दे सकते हैं, लेकिन अंततः सत्य, सदाचार और न्याय का महत्व ही स्थायी रहता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को भी दशहरे के वास्तविक संदेश से परिचित कराना आवश्यक है, ताकि वे जीवन में सत्यनिष्ठा, अनुशासन, सहनशीलता और जिम्मेदारी को अपनाएं। नई पीढ़ी को केवल पर्व मनाने की परंपरा ही नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे नैतिक मूल्यों को समझने और अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा मिलनी चाहिए।
गुरुजी ने अपने संदेश में कहा कि सच्चा विजयदशमी उत्सव तब सार्थक होगा, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर की बुराइयों को दूर करने और अच्छे गुणों को विकसित करने का संकल्प लेगा। यदि मनुष्य अपने अहंकार का त्याग कर सत्य, करुणा और मर्यादा का मार्ग अपनाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की राह मजबूत होगी।
अंत में सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी ने सभी भक्तजनों को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं देते हुए भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने, आपसी सद्भाव बनाए रखने और सत्य एवं धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
