हल्दूचौड़ में दुर्लभ कछुआ मिला, पीयूष जोशी की सजगता से वन विभाग ने किया रेस्क्यू

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सड़क किनारे मिले कछुए को पीयूष जोशी ने सुरक्षित उठाकर वन विभाग को दी सूचना; वन टीम ने मौके पर पहुंचकर किया रेस्क्यू, प्राकृतिक आवास में पुनर्वास की तैया

हल्दूचौड़ (नैनीताल): ग्राम सभा हल्दूचौड़ के दौलिया क्षेत्र में उस समय कौतूहल और संवेदनशीलता का माहौल बन गया, जब सड़क किनारे एक दुर्लभ प्रजाति का कछुआ विचरण करता हुआ पाया गया। सड़क पर वाहनों की तेज आवाजाही के बीच स्थानीय निवासियों की नजर इस जलीय जीव पर पड़ी। इसी दौरान क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी मौके पर पहुंचे।
कछुए की विशिष्ट बनावट और खोल पर मौजूद पीले धब्बों को देखकर पीयूष जोशी ने तुरंत इसके संरक्षण दर्जे (Conservation Status) की पड़ताल की। जांच में यह दुर्लभ ‘इंडियन फ्लैपशेल टर्टल’ (वैज्ञानिक नाम: Lissemys punctata) निकला, जो घटती आबादी के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेड लिस्ट में तथा भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत अत्यंत उच्च संरक्षित श्रेणी में आता है। सड़क किनारे लावारिस हालत में होने के कारण वाहनों की चपेट में आकर इस दुर्लभ जीव की जान जाने का सीधा जोखिम बना हुआ था।
मामले की गंभीरता और वन्यजीव संरक्षण के कड़े नियमों को ध्यान में रखते हुए पीयूष जोशी ने तत्काल वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधा और घटना की विस्तृत सूचना दी। सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दी गई सटीक जानकारी पर वन विभाग ने भी त्वरित संज्ञान लिया। सूचना मिलते ही वन विभाग की ओर से दीप चंद्र आर्य रेस्क्यू किट के साथ फौरन मौके पर पहुंचे।
मौके पर मौजूद पूर्व ग्राम पंचायत सदस्य पुष्पा जोशी और सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी ने स्थानीय लोगों की उपस्थिति में कछुए को विधिवत और सुरक्षित तरीके से वन विभाग की टीम के सुपुर्द किया। वन कर्मियों ने कछुए का मौके पर ही प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें वह पूरी तरह सक्रिय और सुरक्षित पाया गया। इसके उपरांत टीम उसे उसके प्राकृतिक पर्यावास (सुरक्षित जलाशय/वन क्षेत्र) में पुनर्वासित करने के लिए अपने साथ ले गई।
अनुसूची-1 के तहत प्राप्त है सर्वोच्च संरक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार, इंडियन फ्लैपशेल कछुआ भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 (Schedule I) के तहत सर्वोच्च विधिक संरक्षण प्राप्त प्रजाति है। पारिस्थितिक तंत्र में यह जलीय सफाईकर्मी (Scavenger) के रूप में कार्य करता है और जलाशयों के जल को स्वच्छ रखने में अत्यंत अहम भूमिका निभाता है। मानसून के दौरान अक्सर जलभराव, नालों में उफान या भोजन की तलाश में भटककर ऐसे जीव बस्तियों और राजमार्गों की ओर आ जाते हैं, जहां वे अक्सर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी और वन विभाग की संयुक्त सतर्कता के चलते समय रहते एक संरक्षित वन्यजीव को अकाल मौत के मुंह से बचा लिया गया। वन विभाग की टीम ने स्थानीय समाज द्वारा वन्यजीवों के प्रति दिखाई गई इस सजगता और संवेदनशीलता की भूरि-भूरि सराहना की है।