पार्थिव पूजन के महत्व के साथ त्याग, तपस्या, परोपकार और सेवा को बताया भगवान शिव के जीवन का प्रेरणास्रोत
लालकुआं। सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की आराधना और पार्थिव पूजन का क्रम क्षेत्र में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ जारी है। इसी क्रम में आचार्य पंडित महेश चंद्र जोशी द्वारा सावन माह के दौरान करीब 40 घरों में विधि-विधान से पार्थिव पूजन एवं शिव अर्चन कराया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन होकर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगलकामना के लिए पूजा-अर्चना की।
आचार्य महेश चंद्र जोशी ने बताया कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इस पवित्र माह में शिवलिंग का पूजन, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पार्थिव पूजा करने से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि पार्थिव पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, संकल्प और आत्मिक शुद्धि से जुड़ी साधना है। मिट्टी से निर्मित पार्थिव शिवलिंग में भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा करने की परंपरा सनातन धर्म में विशेष स्थान रखती है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव का चरित्र मानव जीवन के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत है। भगवान शिव ने विष को अपने कंठ में धारण कर संसार की रक्षा का संदेश दिया। उनका जीवन त्याग, तपस्या, करुणा, संयम और परोपकार का प्रतीक है। हमें भी भगवान शिव के आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सेवा, त्याग और परोपकार की भावना को स्थान देना चाहिए। केवल पूजा-पाठ करना ही धर्म का उद्देश्य नहीं, बल्कि जरूरतमंद की सहायता करना और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना भी सच्ची शिव भक्ति है।
आचार्य ने कहा कि शिव आराधना व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाने के साथ ही सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। भगवान शिव की साधना हमें यह संदेश देती है कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को धैर्य, संयम और सद्भाव बनाए रखना चाहिए। शिव का स्वरूप हमें अहंकार से दूर रहकर सरलता और सहजता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
पार्थिव पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और पूजन श्रद्धा एवं भक्ति की विशेष साधना मानी गई है। सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पार्थिव पूजन कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजा के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, शिव स्तुति, जलाभिषेक एवं विधिवत पूजन के माध्यम से वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सावन के इस पावन अवसर को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखें, बल्कि भगवान शिव के जीवन और उनके आदर्शों को अपने व्यवहार में उतारने का प्रयास करें। घर-परिवार में प्रेम, समाज में सहयोग और जरूरतमंदों की सेवा का भाव ही शिव आराधना को सार्थक बनाता है।
