लालकुआँ। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर तहसील लालकुआँ में वनाधिकार संगठन और शहीद स्मारक पर इंडिया गठबंधन के लोग आंदोलनरत हैं। इसी बीच, भाकपा माले की एक बैठक में बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा वनाधिकार अधिनियम से नहीं, बल्कि निर्वनीकरण से मिलने तथा सामूहिक दावे आपत्तियों के साथ वापस आने संबंधी बयान दिए जाने पर वनाधिकार समिति बिंदुखत्ता के सचिव भुवन भट्ट ने कड़ा खंडन किया है।
भुवन भट्ट ने कहा कि वनाधिकार समिति के अनुसार, बिंदुखत्ता का सामूहिक दावा जिला स्तरीय समिति (DLC) द्वारा 19 जून 2024 को स्वीकृत किया जा चुका है और अब राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी होना शासन स्तर पर लंबित है। वर्ष 2024 और 2025 में दावे पर तीन बार आपत्तियां आई थीं, जिनका समिति द्वारा कानूनी प्रावधानों के तहत जवाब देकर निराकरण किया जा चुका है।
उन्होंने इंडिया गठबंधन से मांग की कि दावे वापस आने संबंधी बयान के समर्थन में दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। ऐसा न होने पर बिंदुखत्ता के 11,703 दावेदार परिवारों से माफी मांगी जाए।
भट्ट ने स्पष्ट किया कि वनाधिकार अधिनियम, 2006 के तहत अन्य परंपरागत वन निवासी (OTFD) के लिए 75 वर्ष या तीन पीढ़ियों से एक ही स्थान पर निवास करना अनिवार्य नहीं है। सामूहिक दावे की स्थिति में प्रत्येक दावेदार से अलग-अलग व्यक्तिगत साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनिवार्यता भी नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस नेताओं से भी इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करने की अपील की। साथ ही, मीडिया और सोशल मीडिया संपादकों से अनुरोध किया कि बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम से जुड़े संवेदनशील विषयों पर समाचार प्रकाशित करने से पहले संबंधित तथ्यों और अभिलेखों की पुष्टि अवश्य करें।
भुवन भट्ट ने कहा कि बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम के दावे की वर्तमान स्थिति की जानकारी शासन-प्रशासन से प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने स्थानीय लोगों से इस मुद्दे पर एकजुट रहने तथा बाहरी व्यक्तियों द्वारा की जा रही बयानबाजी के संबंध में तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष रखने की अपील की।
