लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग को लेकर 15 अगस्त को शहीद स्मारक से शुरू हुई पदयात्रा विभिन्न गांवों से होते हुए आज रावत नगर पहुंची। बारिश के बावजूद पदयात्रा में सैकड़ों महिला-पुरुषों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। आज रात्रि गौला नदी के किनारे स्थित तीन मंदिर में रात्रिकालीन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें ग्रामीणों को वन अधिकार अधिनियम, 2006 तथा बिंदुखत्ता से जुड़े अभिलेखों और अधिकारों की जानकारी दी जाएगी।
प्रतिदिन होने वाले कार्यक्रम की खास बात यह है कि बिंदुखत्ता के स्थानीय कलाकार सोहनलाल, अर्जुन नाथ, कमल चौहान, केदार पाठक, दीपक पाठक, नीरज द्विवेदी, जीवन पांडेय, ललित मोहन जोशी, मथुरादत्त जोशी, लक्ष्मण दानू सहित अन्य कलाकार भजनों और जनगीतों के माध्यम से वन अधिकार कानून तथा बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने के मुद्दे को ग्रामीणों तक पहुंचा रहे हैं। इन जनगीतों के माध्यम से ग्रामीणों को बिंदुखत्ता के इतिहास और अभिलेखों से जुड़े तथ्यों की जानकारी भी दी जा रही है। गीतों के माध्यम से बताया जा रहा है कि बिंदुखत्ता की बसासत 1932 से पूर्व की है और वर्ष 1952 में यहां प्राथमिक विद्यालय स्थापित हो चुका था। इसके बाद यहां वन विभाग बिना बंदोबस्ती के आया। साथ ही, तीन पीढ़ियों से वन पर निर्भरता के प्रमाण सरकार को सौंपे जा चुके हैं। ग्रामीणों को यह भी समझाया जा रहा है कि तीन पीढ़ियों की शर्त का अर्थ यह नहीं है कि परिवार का प्रत्येक सदस्य 75 वर्षों से उसी स्थान पर रह रहा हो।
इसके अलावा वन अधिकार कानून से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों को भी सरल भाषा में समझाया जा रहा है। इनमें यह जानकारी भी शामिल है कि राजस्व ग्राम बनाने के लिए वन अधिकार अधिनियम के तहत पत्रावली को केंद्र सरकार को भेजना आवश्यक नहीं है तथा देशभर में वन अधिकार कानून के तहत 1700 से अधिक राजस्व ग्राम बनाए जा चुके हैं। संगठन के सचिव बलवंत बिष्ट ने कहा कि गीत, भजन, नुक्कड़ नाटक और जनसंवाद के माध्यम से कानून की जटिल बातों को सरल भाषा में ग्रामीणों तक पहुंचाना जागरूकता का एक अनूठा और प्रभावी माध्यम साबित हो रहा है। ग्रामीण भी इस प्रयास को सहजता और उत्साह के साथ समझ और स्वीकार कर रहे हैं।
