लालकुआं। बिन्दुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की मांग को लेकर आयोजित होने वाले “जन-जन की सरकार, कब आएगी बिन्दुखत्ता के द्वार” कार्यक्रम के संबंध में प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण पहल की गई है।
निदेशक, जनजाति कल्याण विभाग द्वारा जिलाधिकारी नैनीताल को पत्र प्रेषित कर 4 मई से 6 मई 2026 तक आयोजित कार्यक्रम में संबंधित एवं सक्षम अधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कार्यक्रम वनाधिकार संगठन बिन्दुखत्ता द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसमें वनाधिकार कानून, 2006 के अंतर्गत बिन्दुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने के लंबित दावों पर खुली चर्चा होगी।
पत्र के माध्यम से जिला समाज कल्याण अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी कार्यक्रम में प्रतिभाग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि स्थानीय जनता की समस्याओं पर सीधे संवाद स्थापित कर समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
बिन्दुखत्ता के ग्रामीणों ने इस कार्यक्रम को लेकर आशा जताई है कि इससे राजस्व ग्राम की अधिसूचना प्रक्रिया को गति मिलेगी और वर्षों से लंबित मांग का समाधान निकल सकेगा।
बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम को क्रमिक अनशन में शामिल होंगे शांतिपुरी के जनप्रतिनिधि
शांतिपुरी,
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की मांग को लेकर चल रहे जन आंदोलन को शांतिपुरी क्षेत्र से मजबूत राजनीतिक और सामाजिक समर्थन मिला है। गुरुवार को शांतिपुरी नंबर दो के पंचायत भवन सभागार में आयोजित संयुक्त बैठक में जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों और ग्रामीणों ने एक मंच से आंदोलन के पक्ष में आवाज बुलंद की।
वनाधिकार कानून अंतर्गत बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम का दावा स्वीकृत होने के बाद भी अधिसूचना जारी न होने से लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में आयोजित बैठक में जिला पंचायत सदस्य प्रेम आर्य, ग्राम प्रधान तारा मोहन पांडे, दीपा जगदीश कांडपाल, कविता तिवारी और पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट ने स्पष्ट कहा कि बिंदुखत्ता की मांग पूरी तरह जायज है और इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाने की अपील करते हुए आंदोलन को हरसंभव समर्थन देने का भरोसा दिया।
वनाधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद भट्ट ने कहा कि वर्षों से लंबित यह मांग अब जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। उन्होंने बताया कि करीब 12 हजार परिवारों की आबादी वाले बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा न मिलना प्रशासनिक उपेक्षा को दर्शाता है।
इस मौके पर वनाधिकार संगठन के सचिव एडवोकेट बलवंत सिंह बिष्ट, पूर्व सैनिक संगठन से कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, दीपक नेगी, नारायण सिंह कोरंगा, लाल सिंह कोरंगा, मोहन पांडे, प्रताप सिंह बिष्ट, राजेंद्र प्रसाद शर्मा, ललित बिष्ट, दीपक सिंह बिष्ट, इंद्र सिंह हीरा सिंह कोरंगा, चंचल सिंह कोरंगा, सुजान सिंह कार्की, भूपेश बिष्ट, पुष्कर सिंह कोरंगा, जसवंत सिंह कोरंगा, खीम सिंह मेहता, सोनू कार्की सहित कई लोग मौजूद रहे।
वक्ताओं ने बताया कि 4, 5 और 6 मई को प्रस्तावित “सरकार कब आएगी बिंदुखत्ता के द्वार” कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्रभर में जनसंपर्क तेज किया जाएगा। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
