राप्ती नदी के पावन तट पर तीन घंटे छह मिनट तक चला विशेष हवन, देशवासियों की सुख-समृद्धि, पर्यावरण शुद्धि और विश्व कल्याण का लिया गया संकल्प
श्रावस्ती। जय मां पीतांबरी साधना एवं दिव्य योग ट्रस्ट के संस्थापक एवं सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी के निर्देशन में उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जनपद स्थित पावन राप्ती नदी के तट पर मां बगलामुखी के विशेष हवन-यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। लगभग तीन घंटे छह मिनट तक चले इस दिव्य अनुष्ठान में राष्ट्र, समाज और समस्त विश्व के कल्याण, सुख-समृद्धि, प्राकृतिक संतुलन तथा मानवता के मंगल की कामना के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां अर्पित की गईं।
हवन-यज्ञ मेें विभिन्न जनपदों से पहुंचे श्रद्धालुओं और साधकों ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया। संपूर्ण वातावरण वैदिक मंत्रों, यज्ञ की दिव्य सुगंध और आध्यात्मिक ऊर्जा से भक्तिमय हो उठा।

इस अवसर पर सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी ने कहा कि जगत जननी मां पीतांबरा बगलामुखी की कृपा से साधक के जीवन में आने वाले अनेक कष्ट, रोग, दोष और मानसिक बाधाओं का निवारण होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रकृति का अंधाधुंध दोहन मानवता के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है, जिसके कारण प्राकृतिक असंतुलन और दैवीय आपदाओं की आशंका लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में वैदिक परंपरा के अनुसार किए जाने वाले हवन-यज्ञ पर्यावरण, वायु और जल की शुद्धि के साथ सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार का माध्यम बनते हैं।
गुरुजी ने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन स्थापित करने का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक माध्यम भी है। उन्होंने लोगों से प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और आध्यात्मिक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
अनुष्ठान के उपरांत गुरुजी ने दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं से भेंट कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हुए उनके समाधान के लिए आवश्यक सुझाव दिए।
एक ही आदिशक्ति से संचालित हो रहा है समस्त ब्रह्मांड : सत्य साधक
अपने आध्यात्मिक संदेश में सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी ने कहा कि समस्त ग्रह, नक्षत्र, जीव-जगत और समूचा ब्रह्मांड एक ही दिव्य आदिशक्ति से संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यही ऊर्जा देवी स्वरूप है, जो समस्त सृष्टि के प्रत्येक कण में विद्यमान है।
उन्होंने कहा कि इस आदिशक्ति को कोई देवी, कोई शक्ति, कोई दुर्गा, काली, पीतांबरा, सरस्वती, लक्ष्मी अथवा गौरी के नाम से पूजता है, किंतु सभी मान्यताओं का मूल स्वरूप मातृशक्ति ही है। समस्त जड़ एवं चेतन जगत उसी शक्ति से उत्पन्न हुआ है और अंततः उसी में विलीन हो जाता है। यह शक्ति ब्रह्मांड के कण-कण में विद्यमान है, लेकिन मनुष्य रज, तम और सत्व गुणों की त्रिगुणात्मक प्रवृत्तियों में उलझकर इस परम सत्य को पहचान नहीं पाता।
उन्होंने कहा कि जब साधना, ध्यान और यज्ञ के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर की चेतना को जागृत करता है, तभी वह इस दिव्य शक्ति का अनुभव कर सकता है और जीवन में आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है।
वर्षभर चलता है मां बगलामुखी हवन का दिव्य अनुष्ठान
राप्ती नदी के पावन तट पर सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी के निर्देशन में लोकमंगल एवं विश्व कल्याण की भावना से वर्षभर नियमित रूप से मां बगलामुखी हवन एवं साधना का आयोजन किया जाता है। गुरुजी के मार्गदर्शन में अब तक यहां एक हजार से अधिक बार साधना, हवन-यज्ञ एवं विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान सफलतापूर्वक संपन्न किए जा चुके हैं।
आयोजकों के अनुसार इन अनुष्ठानों का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाना, मानव जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना तथा राष्ट्र और विश्व के लिए शांति, समृद्धि एवं लोकमंगल की भावना को सशक्त करना है।
