बिंदुखत्ता। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग को लेकर वन अधिकार संगठन द्वारा चलाई जा रही पदयात्रा आज 29वें दिन तिवारी नगर हाट कालिका मंदिर से शुरू होकर शास्त्री नगर होते हुए 17 एकड़ के पास स्थित भगवती मंदिर पहुंची। यहां से पदयात्रा कल बिंदुखेड़ा क्षेत्र में प्रवेश करेगी। आज की पदयात्रा में सैकड़ों महिला-पुरुषों ने भाग लिया और पूरे रास्ते “बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाओ” तथा “घोषणा नहीं, अधिसूचना चाहिए” जैसे नारे लगाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बिंदुखत्ता की राजस्व ग्राम की अधिसूचना तत्काल जारी करने की मांग की।
पदयात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर हुई नुक्कड़ सभाओं में वक्ताओं ने कहा कि जब वन अधिकार कानून के तहत बिंदुखत्ता की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 19 जून 2024 को जिला स्तरीय समिति द्वारा सर्वसम्मति से प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, तो सरकार अधिसूचना जारी करने में देरी क्यों कर रही है? वक्ताओं ने कहा कि नए कानून के तहत अधिकारों की मान्यता के लिए पुराने प्रावधानों को आधार बनाकर अनावश्यक रूप से वन भूमि अनारक्षण, बदले में भूमि उपलब्ध कराने अथवा केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जैसी बाध्यताएं नहीं थोपी जा सकतीं।
पदयात्रा में वन अधिकार संगठन के सदस्य दीपक पाठक ने स्वरचित गीत के माध्यम से बिंदुखत्ता के इतिहास और राजस्व ग्राम की मांग को लोगों के बीच रखा। उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता की बसासत 1932 से भी पहले की है। 1932 के प्रमाण, 1952 में स्थापित विद्यालय और 1960 के दशक में स्थापित दुग्ध डेयरी जैसे दस्तावेज इस क्षेत्र की पुरानी बसासत के प्रमाण हैं। जबकि वन विभाग स्वयं 1966 के बाद यहां आया है।दीपक पाठक ने कहा कि “कागजी कार्रवाई पूरी है, तो देरी किस बात की है?” उन्होंने कहा कि वन अधिकार कानून लागू होने के बाद देश के 1700 से अधिक वन ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा मिला है, लेकिन बिंदुखत्ता की पत्रावली में सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद अधिसूचना जारी नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता के लोग वर्षों से सरकारों और जनप्रतिनिधियों से राजस्व ग्राम का आश्वासन सुनते आए हैं, लेकिन अब सवाल आश्वासन का नहीं, अधिसूचना का है। उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता की जनता अब केवल कागजी वादों के भरोसे नहीं बैठेगी और अपने अधिकार के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी।
आज की पदयात्रा में उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, नंदन बोरा, चंचल सिंह कोरंगा, इंद्र सिंह पनेरी, हीरा सिंह बिष्ट, दौलत सिंह कोरंगा, खुशाल सिंह कोश्यारी, बलवंत बिष्ट, भवान सिंह कठायत, बलवंत संम्मल, कमल सिंह बिष्ट, रमेश बिष्ट , लोक कलाकार जीवन पाण्डे, दीपक पाठक, सोहन लाल, भरत नेगी, दीपक जोशी, भूपेश जोशी, करम सिंह कोरंगा, दानी कोरंगा, ममता बिष्ट, मीना मेहता सहित सैकड़ों महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल रहे।
