बथुआ साग खाने के फायदे

बथुआ :- जिनके लीवर के अंदर गांठ हो जाती है जैसे कई बार अंदर कैंसर की गांठे डवलप हो जाती हैं. बॉडी में कहीं भी गांठे होती हैं तो आप बथुए को तोड़कर बथुए को जड़ सहित डब्बे में भरकर सुखाकर पाउडर बना लें। 10 ग्राम इस पाउडर को लीजिए और 400 ग्राम पानी में पकाएं पकाने के बाद जब ये लगभग 50 ग्राम बच जाए तो छानकर इस काढ़े को पीजिए। इसे पीने से शरीर के अंदर की गांठे घुल जाएंगी। गांठ को घोलने वाली जो दवाएं हैं यदि बथुए के काढ़े को उनके साथ भी लिया जाए तो जल्दी ही गांठ घुल जाती है। काढ़ा पीने से कैंसर होने की संभावना भी कम होती है।पथरी के लिए भी ये काढ़ा बहुत फायदेमंद है। आचार्य जी कहते हैं कि ये बथुआ सिर्फ एक साग नहीं है बल्कि बीमारियों को जड़ से मिटाने वाली ये लाभकारी औषधी है।यह मर्दाना शक्ति को बढ़ाता है। भूख बढ़ाता है।पथरी : पथरी की समस्या को खत्म करने के लिए शक्कर को एक गिलास बथुए के रस में मिलाकर पीने से पथरी कुछ दिनों में गलकर बाहर आ जाती है।जुएं : जुएं खत्म करने के लिए बथुआ महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्म पानी में बथुए के पत्तों को उबाल लें और उसे ठंठा करके उससे सिर को अच्छे से धोएं। यह उपाय जुओं को मार देता है।बवासीर : बथुए को उबालें और उसका पानी पीने से बवासीर ठीक होता है।दाद होने पर : दाद की समस्या होने पर बथुए को उबालें और इसका रस पीएं। दूसरा उपाय बथुए के रस में तिल के तेल को मिलाकर हल्की आंच में गर्म कर लें और जब तेल जल जाए तब इसे छानकर किसी शीशी में डाल लें। और इस तेल को दाद पर लगाएं।दिल की बीमारी में : दिल के रोग में बथुआ बेहद फायदेमंद होता है। बथुए से लाल रंग की पत्तियों को छांट लें और इसका रस निकाल लें और इसमें सेंधा नमक डालकर सेवन करें।शरीर की जलन : यदि शरीर का कोई हिस्सा जल गया हो और उस पर जलन लग रही हो तो ऐसे में बथुए के पत्तों को पीसें और इसका लेप जलन वाली जगह पर लगाएं। इससे जल्दी ही जलन शांत हो जाती है।कब्ज दूर करने के लिए : दो चम्मच बथुए का रस पीने से कब्ज दूर होती है। आप बथुए का साग व इसका उबला हुआ पानी का सेवन करने से कब्ज दूर होती है।लीवर के लिए : बथुए का साग नियमित खाने से लीवर मजबूत होता है।पेट के कीड़े : यदि पेट में कीड़े हो गए हों तो बथुए को पानी में तब तक उबालें जब तक वह आधा न रह जाए। फिर इसे ठंडा करके सेवन करें। इस उपाय से पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं।नकसीर में : यदि नाक से खून बहता हो तो बथुए के रस की चार बूंदे पीने से नकसीर बहना ठीक रहता है।

खतरनाक हो सकते है इन लोगों के लिए गन्ने का रस

गर्मी के मौसम में गन्ने का रस पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इससे शरीर को ठंडक मिलती है और लू लगने का खतरा भी नहीं रहता लेकिन गन्ने का रस सभी लोगों के लिए फायदेमंद नहीं होता क्योंकि इसमें काफी मात्रा में मीठा होता है जिस वजह से शरीर में शुगर लेवल बढ़ता है। आइए जानिए किन लोगों को इस रस का सेवन करने से बचना चाहिए।

1] मोटे लोग: जिन लोगों के शरीर का वजन ज्यादा होता है उन्हें गन्ने का रस नहीं पीना चाहिए। इसमें काफी मात्रा में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं जो मोटापा बढ़ाते हैं।

2] डायबिटीज:  इस रस को पीने से शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ती है। ऐसे में डायबिटीज के रोगी को गन्ने का रस नहीं पीना चाहिए

3] दांत में दर्द: दांत में दर्द होने पर भी गन्ने का रस न पीएं। इसमें अधिक मीठा होने की वजह से कैविटी की समस्या हो जाती है जिससे दांत में दर्द बढ़ सकता है।

4] पेट में कीड़े: जिन लोगों के पेट में कीड़े होते हैं या पेट की कोई और समस्या हो तो उन्हें भी गन्ने का रस नहीं पीना चाहिए।

5] कफ: खांसी या बलगम होने पर भी इसका सेवन करने से बचें। इससे शरीर में कफ की समस्या बढ़ जाती है।

गोमूत्र कैंसर से लड़ने की रामबाण दवा

गाय के दही, मूत्र तथा तुलसी पत्रों के योग से असाध्य कहे जाने वाले रोग कैंसर की औषधि तैयार की जा सकती है। इससे कैंसर के अनेक रोगियों को रोगमुक्त करने में सफलता मिली है। वह योग निम्न प्रकार से तैयार किया जा सकता है। ये रहे गोमूत्र चिकित्सा के 11 फायदे और 7 सावधानियां त्वचा के कैंसर से बचना है, तो पढ़ें 5 टिप्स किडनी कैंसर के बारे 5 बातें, आपको पता होना चाहिए। भारतीय नस्ल की गाय के दूध का एक पाव से आधा किलो दही, 4 चम्मच गोमूत्र, 5 से 10 पत्ते तुलसी पत्र, कुछ शुद्ध मधु- इन चारों पदार्थों को एक पात्र में मिलाकर, मथकर प्रात:काल खाली पेट प्रतिदिन केवल एक बार पीने से तथा 1 वर्ष तक के इस प्रयोग से प्रारंभिक अवस्था का कैंसर पूरी तरह दूर हो जाता है। गोमूत्र में हरड़ (हर्रे) भिगोकर धीमी आंच पर गरम करें। जलीय भाग जल जाने पर उस हरड़ का चूर्ण बना लें। अब इस चूर्ण का प्रतिदिन सेवन करें।यह चूर्ण अनेक रोगों की रामबाण दवा है।दरअसल गोमूत्र में काबोलिक एसिड भी होता है, जो कीटाणुनाशक है। इसमें हृदय और मस्तिष्क के विकारों को भी दूर करने की जादुई क्षमता है।इसके अलावा गाय के शरीर पर हाथ फेरने से, उसके श्वास से अनेक प्रकार के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। गोबर के कंडों की राख से दुर्गंध देखते ही देखते काफूर हो जाती है। कब्ज, खांसी, दमा, जुकाम, जीर्ण ज्वर, उदर रोग तथा चर्म रोग आदि में गोमूत्र रामबाण दवा का काम करता है।

वजन घटाने के लिए आप अपनायें यह उपाय

लोग वजन कम करने के लिए बहुत सारे तरीके अपनाते है|पर उनको कामयाबी नहीं मिल पाती|अगर आप भी ऐसे ही उपाय कर कर के थक चुके है तो हमारे द्वारा बताये हुए इन कुछ उपयो को अपनाये,इन उपयो को अपना कर बहुत जल्दी आप अपने बढे हुए वजन से छुटकारा पा सकते है .

1-लाल मिर्च का सेवन वजन को कम करने में मदद करता है|इसमें भरपूर मात्रा में बायोएक्टिव कंपाउंड होता है जो भूख को कंट्रोल करके वजन कम करता है|
2-वजन कम करने के लिए रोज पपीते का सेवन करना चाहिए|                                                                                                                   3-काली मिर्च में मौजूद एल्कोलॉयड पाइपरीन नमक तत्व कई तरह से आपके बढ़ते हुए वेट को कंट्रोल करता है|
4-अगर आप अपना वजन कम करना चाहते है तो रोजाना 8 गिलास ठंडा पानी पिए|पानी आपकी बॉडी से फैट को कम करता है|एक दिन में 8 गिलास पानी पीने से 70 कैलोरीज कम होती हैं|

बथुआ साग का सेवन करने आप बच सकते है बहुत सारी बीमारियों से

हमारे शरीर में अक्सर ऐसा होता है कि किसी वजह से गांठ बनने लगती है जो अक्सर किसी बड़ी बीमारी का रूप ले लेती है. अगर आपके शरीर में कोई गांठ हो तो उसके लिए बथुए का इस्तेमाल कैसे किया जाए. बता रहे हैं, आचार्य बाल कृष्णा जी। बथुए को यूं तो साग-सब्जी के रूप में खाया जाता है लेकिन इस बथुए को लोग घरों में आमतौर पर लगाते नहीं है। क्या आप जानते हैं बथुए का सेवन करके बहुत सारी बीमारियों से बचा जा सकता है। बथुआ का सेवन करने से आप कई तरह की बीमारियों से बच सकते हो । बथुआ के अंदर कई तरह के पोषक तत्वों की भरमार होती है ।आयुवेर्द के अनुसार बथुआ की सब्जी खाने से पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं। शहरी और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बथुआ एक पौष्टिक आहार है। बथुआ आपको दिसंबर से मार्च तक के महीनों में आसानी से मिल जाता है। बथुआ हरी सब्जीयों में आता है। जिसमें कैल्श्यिम, पोटैशियम और विटामिन ए की मात्रा अधिक होती है।बथुआ एक खरपतवार के रूप में जाना जाता है। बथुए का पौधा जौ और गेहूं के खेत में अपने आप ही उग जाता है। बथुए को साग के रूप में खाया जाता है। इसमें लोहा और क्षार पाया जाता है जो शरीर को पथरी से बचाता है। इसकी सब्जी जितनी खाए जाए उतना ही बेहतर होता है। कई तरह के नामों से जाना जाता है बथुआ। इसे क्षारपत्र और व्हाइट गूज फुट के नाम से जाना जाता है। आइये जानते हैं बथुआ खाने के फायदें। बथुआ दो प्रकार का होता है। एक जिसके पत्ते लाल होते है। और दूसरा जिसके पत्ते चौड़े व बड़े होते हैं।