दतिया धाम: दशहरे पर सत्य साधक गुरुजी का संदेश, मन के विकारों पर विजय ही सच्ची जीत

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विजयादशमी को आत्मशुद्धि, धर्म और सदाचार का प्रतीक बताते हुए गुरुजी ने भक्तों को दिया मां भगवती की कृपा का संदेश, दतिया धाम में 36 दिवसीय निराहार साधना जारी

दतिया धाम, मध्य प्रदेश। विजयादशमी का पर्व केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद नकारात्मक विचारों और दुर्गुणों को समाप्त कर जीवन को सत्य, सदाचार और आध्यात्मिक चेतना के मार्ग पर आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी देता है। इसी आध्यात्मिक संदेश के साथ दतिया धाम से सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी ने दशहरा पर्व पर समस्त श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए मां पीतांबरी और मां भगवती से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की कामना की।
सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी ने विजयादशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दशहरा हमें अन्याय, अहंकार और अधर्म के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है। इस पर्व का वास्तविक संदेश तभी सार्थक होता है, जब मनुष्य अपने आचरण में सत्य, करुणा, संयम और विनम्रता को स्थान देता है। जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए केवल बाहरी बुराइयों का विरोध करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने भीतर की कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का संकल्प लेना भी आवश्यक है।
अहंकार, क्रोध और लोभ पर विजय ही पर्व का वास्तविक संदेश
गुरुजी ने अपने आध्यात्मिक संदेश में कहा कि मनुष्य के भीतर पनपने वाला अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह उसके विवेक को प्रभावित करते हैं। इन दुर्गुणों पर नियंत्रण पाकर ही व्यक्ति अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है। दशहरे का पर्व इसी आत्ममंथन का अवसर प्रदान करता है। जिस प्रकार भगवान श्रीराम की विजय धर्म और मर्यादा की स्थापना का प्रतीक मानी जाती है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े रहने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धर्म का मार्ग केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरों के प्रति सद्भाव रखने, जरूरतमंदों की सहायता करने और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने में भी इसकी सार्थकता निहित है। जब मनुष्य के विचार और कर्म पवित्र होते हैं, तभी समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता का वातावरण निर्मित होता है। विजयादशमी का पर्व लोगों को इसी जीवनमूल्य की याद दिलाता है।
मां भगवती की आराधना से मिलता है आत्मबल
सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी ने मां भगवती की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रद्धा और समर्पण के साथ की गई आराधना मनुष्य को आत्मबल प्रदान करती है। मां की कृपा का स्मरण करते हुए व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, विश्वास और साहस बनाए रख सकता है। आध्यात्मिक साधना का उद्देश्य मन को निर्मल बनाना और जीवन में सद्विचारों को मजबूत करना है। विजयादशमी पर लिया गया सदाचार और आत्मसंयम का संकल्प व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन सकता है।
गुरुजी ने श्रद्धालुओं के सुखमय जीवन की कामना करते हुए दशहरा पर्व को धर्म, मर्यादा और सद्भाव के आदर्शों को अपनाने का अवसर बताया। उन्होंने मां भगवती से प्रार्थना की कि सभी भक्तों पर उनकी कृपा बनी रहे और प्रत्येक परिवार में सुख, शांति, आरोग्य तथा समृद्धि का वास हो।
दतिया धाम में 36 दिवसीय निराहार साधना में लीन हैं गुरुजी
गौरतलब है कि सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी मध्य प्रदेश के दतिया स्थित मां पीतांबरा शक्तिपीठ के समीप ऐतिहासिक राम जानकी मंदिर में प्रथम नवरात्र से 36 दिवसीय निराहार साधना कर रहे हैं। उनकी यह साधना 17 नवंबर तक चलेगी। साधना की पूर्णाहुति के अवसर पर 17 नवंबर को मां बगलामुखी महायज्ञ आयोजित किया जाएगा, जबकि 18 नवंबर को विशाल भंडारे का आयोजन निर्धारित है।
दतिया धाम में चल रही इस साधना के बीच विजयादशमी का पर्व धर्म, आस्था और आत्मशुद्धि के संदेश को विशेष महत्व प्रदान करता है। गुरुजी का संदेश है कि पर्वों की वास्तविक सार्थकता उनके आध्यात्मिक आदर्शों को अपने व्यवहार में उतारने और जीवन को सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ाने में है।