महंगाई की मार: एलपीजी सिलेंडर फिर हुआ महंगा , जानिए कितने रुपए की हुई बढ़ोतरी

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पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष का असर अब आम लोगों की रसोई पर भी पड़ने लगा है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये और वाणिज्यिक सिलेंडर में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है।

रसोई गैस सिलेंडर 60 रुपये महंगा, वाणिज्यिक सिलेंडर में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी!

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल आया है, जिसका असर भारत में भी देखने को मिला है। घरेलू एलपीजी (रसोई गैस) सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये और वाणिज्यिक सिलेंडर में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें 7 मार्च से लागू हो गई हैं।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की वेबसाइट के अनुसार अब दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का गैर-सब्सिडी वाला घरेलू गैस सिलेंडर 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये का हो गया है। एक साल से भी कम समय में गैस की कीमत में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले पिछले साल अप्रैल में भी 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
अन्य महानगरों की बात करें तो मुंबई में घरेलू एलपीजी की कीमत 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये हो गई है। राज्यों में स्थानीय कर और वैट के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को फिलहाल राहत बरकरार रहेगी। योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को साल में 12 सिलेंडरों पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती रहेगी।
वहीं होटल, ढाबों और रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमत में भी 114.5 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब इसकी कीमत 1,883 रुपये हो गई है। इससे पहले 1 मार्च को भी 28 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इस साल वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में कुल 302.50 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है।
ऊर्जा बाजार से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 35.63 प्रतिशत बढ़कर 90.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसी तरह एशियाई एलएनजी की कीमत भी बढ़कर तीन साल के उच्च स्तर 25.40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू पर पहुंच गई है।
रूस ने तेल निर्यात के आंकड़े साझा करने से किया इनकार
मॉस्को। रूस ने कहा है कि वह भारत को किए जाने वाले कच्चे तेल के निर्यात का आंकड़ा सार्वजनिक नहीं करेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने यह बयान अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के उस बयान के बाद दिया, जिसमें पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने की बात कही गई थी। पेसकोव ने कहा कि कई “बुरा चाहने वाले” होने के कारण रूस यह आंकड़े सार्वजनिक नहीं करेगा।