अगर आजमाएंगे ये 6 तरीके तो मेमोरी खाली करते समय नहीं होगा हैंग

स्मार्टफोन हर कोई इस्तेमाल करता है। यूजर्स अपने फोन में अपनी निजी फाइल्स, फोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट्स को सेव करके रखते हैं। इसके लिए उन्हें फोन में ज्यादा स्पेस की आवश्यकता होती है। कई यूजर्स को फोन में कम मैमोरी की प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनके फोन में एसडी कार्ड नहीं होता। इस परेशानी के चलते यूजर्स एप्स इंस्टॉल करने में भी असमर्थ रहते हैं। हालांकि, अगर यूजर चाहें तो लो मेमोरी की इस प्रॉब्लम को खूद सॉल्व कर सकते हैं। कैसे? तो चलिए हम आपको इसका तरीका बता देते हैं।

क्लियर कैश और डाटा :

फोन में स्पेस खाली करने का सबसे अच्छा तरीका कैश को क्लियर करना है। इसके लिए यूजर्स को सेटिंग्स में जाना होगा। फिर स्टोरेज में जाकर एप्स पर टैप करना होगा। इसके बाद हर एप को ओपन करें और Clear Data और Clear Cache के ऑप्शन पर क्लिक कर दें। इसके अलावा फोन की इंटरनल मैमोरी के कैश को भी क्लियर करना आवश्यक होता है। इसके लिए सेटिंग्स पर जाकर स्टोरेज पर जाना होगा। फिर इंटरनल स्टोरेज पर जाकर Cached data पर टैप कर दें।

गूगल फोटोज का इस्तेमाल :

अगर आपके फोन में एसडी कार्ड का ऑप्शन नहीं है तो आप अपनी फोटोज को गूगल फोटोज में मूव कर सकते हैं। गूगल यूजर्स को 15 जीबी का फ्री क्लाउड स्पेस देती है। इसमें 16 एमपी साइज वाली फोटोज और एचडी वीडियो को सेव कर सकते हैं।

लाइट एप्स का इस्तेमाल :

सभी के फोन में फेसबुक, मैसेंजर और यूट्यूब समेत कई एप्स मौजूद होती हैं। इन एप्स और इनके अपडेट्स से फोन की मैमोरी काफी हद तक भर जाती है। आपको बता दें कि इन सभी एप्स का प्ले स्टोर पर लाइट वर्जन भी मौजूद है। लाइट वर्जन फोन की इंटरनल मैमोरी में कम स्पेस लेते हैं।

क्लाउड स्टोरेज का यूज :

अगर आपके फोन की इंटरनल मैमोरी भर जाती है तो आप क्लाउड स्टोरेज देने वाले एप्स जैसे Dropbox, OneDrive और Google Drive में अपना डाटा सेव कर सकते हैं। यहां डाटा बिल्कुल सुरक्षित रहता है। यहां पर डॉक्यूमेंट्स को अलग-अलग फोल्डर बनाकर अरेंज किया जा सकता है।

पुराना डाटा डिलीट करना :

कई बार हम फोटोज या वीडियो डाउनलोड करके भूल जाते हैं। ये डाटा फोन की मैमोरी लगातार भरता रहता है। ऐसे में इन्हें डिलीट करना एक बेहतर ऑप्शन है। इससे आपके फोन की मैमोरी में स्पेस बन जाएगा।

एप्स को एसडी कार्ड में करें ट्रांसफर :

अगर आपके पास एसडी कार्ड है तो आप फोन में मौजूद एप्स को उसमें मूव कर सकते हैं। क्योंकि ये सभी फोन की इंटरनल मैमोरी में सेव होती हैं। इसके लिए सेटिंग्स में जाकर स्टोरेज में जाएं और फिर एप्स पर टैप करें। इसके बाद Move to card पर टैप कर दें। आपको बता दें कि जो एप्स में प्री-इंस्टॉल्ड होती हैं या रजिस्टर्ड होती हैं उन्हें मूव नहीं किया जा सकता है।

अगर आजमाएंगे ये 6 तरीके तो मेमोरी खाली करते समय नहीं होगा हैंग आपका स्मार्टफोन

स्मार्टफोन हर कोई इस्तेमाल करता है। यूजर्स अपने फोन में अपनी निजी फाइल्स, फोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट्स को सेव करके रखते हैं। इसके लिए उन्हें फोन में ज्यादा स्पेस की आवश्यकता होती है। कई यूजर्स को फोन में कम मैमोरी की प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनके फोन में एसडी कार्ड नहीं होता। इस परेशानी के चलते यूजर्स एप्स इंस्टॉल करने में भी असमर्थ रहते हैं। हालांकि, अगर यूजर चाहें तो लो मेमोरी की इस प्रॉब्लम को खूद सॉल्व कर सकते हैं। कैसे? तो चलिए हम आपको इसका तरीका बता देते हैं।

क्लियर कैश और डाटा :

फोन में स्पेस खाली करने का सबसे अच्छा तरीका कैश को क्लियर करना है। इसके लिए यूजर्स को सेटिंग्स में जाना होगा। फिर स्टोरेज में जाकर एप्स पर टैप करना होगा। इसके बाद हर एप को ओपन करें और Clear Data और Clear Cache के ऑप्शन पर क्लिक कर दें। इसके अलावा फोन की इंटरनल मैमोरी के कैश को भी क्लियर करना आवश्यक होता है। इसके लिए सेटिंग्स पर जाकर स्टोरेज पर जाना होगा। फिर इंटरनल स्टोरेज पर जाकर Cached data पर टैप कर दें।

गूगल फोटोज का इस्तेमाल :

अगर आपके फोन में एसडी कार्ड का ऑप्शन नहीं है तो आप अपनी फोटोज को गूगल फोटोज में मूव कर सकते हैं। गूगल यूजर्स को 15 जीबी का फ्री क्लाउड स्पेस देती है। इसमें 16 एमपी साइज वाली फोटोज और एचडी वीडियो को सेव कर सकते हैं।

लाइट एप्स का इस्तेमाल :

सभी के फोन में फेसबुक, मैसेंजर और यूट्यूब समेत कई एप्स मौजूद होती हैं। इन एप्स और इनके अपडेट्स से फोन की मैमोरी काफी हद तक भर जाती है। आपको बता दें कि इन सभी एप्स का प्ले स्टोर पर लाइट वर्जन भी मौजूद है। लाइट वर्जन फोन की इंटरनल मैमोरी में कम स्पेस लेते हैं।

क्लाउड स्टोरेज का यूज :

अगर आपके फोन की इंटरनल मैमोरी भर जाती है तो आप क्लाउड स्टोरेज देने वाले एप्स जैसे Dropbox, OneDrive और Google Drive में अपना डाटा सेव कर सकते हैं। यहां डाटा बिल्कुल सुरक्षित रहता है। यहां पर डॉक्यूमेंट्स को अलग-अलग फोल्डर बनाकर अरेंज किया जा सकता है।

पुराना डाटा डिलीट करना :

कई बार हम फोटोज या वीडियो डाउनलोड करके भूल जाते हैं। ये डाटा फोन की मैमोरी लगातार भरता रहता है। ऐसे में इन्हें डिलीट करना एक बेहतर ऑप्शन है। इससे आपके फोन की मैमोरी में स्पेस बन जाएगा।

एप्स को एसडी कार्ड में करें ट्रांसफर :

अगर आपके पास एसडी कार्ड है तो आप फोन में मौजूद एप्स को उसमें मूव कर सकते हैं। क्योंकि ये सभी फोन की इंटरनल मैमोरी में सेव होती हैं। इसके लिए सेटिंग्स में जाकर स्टोरेज में जाएं और फिर एप्स पर टैप करें। इसके बाद Move to card पर टैप कर दें। आपको बता दें कि जो एप्स में प्री-इंस्टॉल्ड होती हैं या रजिस्टर्ड होती हैं उन्हें मूव नहीं किया जा सकता है।

स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ इन 5 तरीकों से बढ़ सकती है

स्मार्टफोन के बाजार में आने के बाद से अब तक उनकी डिजाइन, कैमरा, लुक, प्रॉसेसिंग पावर को लेकर कई बदलाव हो चुके हैं। मगर, इनके साथ जो समस्या पहले दिन से मौजूद थी, वह आज भी जारी है और वह है खराब बैटरी लाइफ। स्मार्टफोन की बैटरी टेक्नोलॉजी में अभी तक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे ही तरीके, जिनसे आपके स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ बढ़ जाएगी।

फेसबुक को डिलीट करें

अध्ययनों ने साबित किया है कि फेसबुक आपके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। मगर, यह आपके स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ के लिए भी खतरनाक है। किसी भी फोन एक्टिविटी खासतौर पर ऐप के उपयोग से बैटरी तेजी से खत्म होती है। मगर, फेसबुक के ऐप से अन्य ऐप की तुलना में बैटरी ज्यादा खर्च होती है। तब भी जब आप इसका कम उपयोग कर रहे हों। पत्रकार जॉन कॉट्सिएर ने जब फोन से फेसबुक को हटाया, तब उन्हें इसका पता चला। उन्होंने पाया कि रोजाना की बैटरी खपत में अकेले फेसबुक ही 50 फीसद बैटरी का उपयोग कर रहा था।

वाइब्रेशन को बंद करें

हम फोन पर टाइप करते हुए हल्के वाइब्रेशन को ऑन रखते हैं। मगर, ये काफी बैटरी की खपत करते हैं क्योंकि लोग सोशल मीडिया में सक्रिय रहने के साथ ही मैसेज भी करते हैं। इसके अलावा बैटरी के नोटिफिकेशन्स आने पर भी वाइब्रेशन मोड लगा होने पर काफी बैटरी खर्च होती है। इसकी जगह रिंग को एक्टिवेट करें।

ब्लैक वॉलपेपर का इस्तेमाल करें

यदि आपके स्मार्टफोन पर AMOLED डिस्प्ले है, तो ब्लैक वॉलपेपर का इस्तेमाल करें, इससे आपके फोन की बैटरी लाइफ बढ़ जाएगी। दरअसल, AMOLED डिस्प्ले पिक्सेल के हल्के रंगों को रोशन करने के लिए बैटरी का यूज करते हैं। काले रंग को दिखाने के लिए पावर की जरूरत नहीं होती है। यानी AMOLED डिस्प्ले में जितने अधिक डार्क या काले पिक्सल होंगे, उतनी ही बैटरी खर्च होगी और फोन ज्यादा समय तक काम करेगा।

लोकेशन ट्रैकिंग को बंद कर दें

स्मार्टफोन में इंस्टॉल किए जाने वाले अधिकांश ऐप लगातार आपकी लोकेशन को ट्रैक करते हैं। मगर, सारे ऐप को अपनी लोकेशन ट्रैक करने की इजाजत देने की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे भी काफी बैटरी खर्च होती है। इसके अलावा जब आप अपने फोन को वीडियो देखने या मेल भेजने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, तो भी इसे बंद कर दें।

फोन के रखें अपडेट

ऐप्स को लगातार अपडेट करना मुश्किल काम है, लेकिन इससे स्मार्टफोन की परफॉर्मेंस के साथ ही बैटरी लाइफ भी बेहतर होती है। दरअसल, ऐप्स के डेवलपर्स बैटरी और मेमोरी के अधिकतम सुधार के लिए ऐप्स को अपडेट करते हैं। इसलिए स्मार्टफोन में हमेशा लेटेस्ट वर्जन ही इंस्टॉल करें।

भारत ने साउथ एशिया सैटेलाइट को किया लॉन्च

चेन्नई :- भारत ने साउथ एशिया सैटेलाइट को इसरो ने लॉन्च कर दिया है. इसे शुक्रवार शाम 4:57 मिनट पर श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया. 50 मीटर ऊंचे रॉकेट के जरिए भेजा गया यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में शांतिदूत की भूमिका निभाएगा. गौरतलब है कि जीएसएलवी रॉकेट की यह 11वीं उड़ान है.इस सैटेलाइट के लॉन्च से दक्षिण एशियाई देशों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलेगा.पीएम मोदी ने इस बड़ी सफलता पर इसरो को बधाई दी है. जीसैट-9 को भारत की ओर से उसके दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के लिए उपहार माना जा रहा है. भारत, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और मालदीव इस प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं. पाकिस्तान ने कहा है कि उसका अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम हैइस लिए वह इस प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बना है. बता दें कि इस सैटेलाइट की मदद से प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग की जा सकेगी, टेली मेडिसिन, शिक्षा में सहयोग बढ़ेगा. भूकंप, चक्रवात, बाढ़, सुनामी की दशा में संवाद-लिंक का माध्यम होगी. यह अंतरिक्ष आधारित टेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल में मदद करेगा.इसमें भागीदारी देशों के बीच हॉटलाइन उपलब्ध करवाने की भी क्षमता है. बीते रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मोदी ने घोषणा की थी कि दक्षिण एशिया उपग्रह अपने पड़ोसी देशों को भारत की ओर से कीमती उपहार होगा. मोदी ने कहा था कि पांच मई को भारत दक्षिण एशिया उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा. इस सैटेलाइट को कूटनीतिक स्तर पर भारत के मास्टर स्ट्रोक की तरह देखा जा रहा है. इससे पहले संचार उपग्रह जीएसएटी-8 का प्रक्षेपण 21 मई 2011 को फ्रेंच गुएना के कोउरो से हुआ था. इसरो के मुताबिक-इसके ज़रिए सभी सहयोगी देश अपने-अपने टीवी कार्यक्रमों का प्रसारण कर सकेंगे. किसी भी आपदा के दौरान उनकी संचार सुविधाएं बेहतर होंगी.इससे देशों के बीच हॉटलाइन की सुविधा दी जा सकेगी और टेली मेडिसिन सुविधाओं को भी बढ़ावा मिलेगा. साउथ एशिया सैटेलाइट की लागत क़रीब 235 करोड़ रुपए है जबकि सैटेलाइट के लॉन्च समेत इस पूरे प्रोजेक्ट पर भारत 450 करोड़ रुपए खर्च करने जा रहा है. अफ़गानिस्तान ने अभी साउथ एशिया सैटलाइट की डील पर दस्तखत नहीं किए हैं, क्योंकि उसका अफ़गानसैट अभी काम कर रहा है. यह भारत का ही बना एक पुराना सैटलाइट है, जिसे यूरोप से लीज पर लिया गया है.2015 में आए भूकंप के बाद नेपाल को भी एक संचार उपग्रह की ज़रूरत है, नेपाल ऐसे दो संचार उपग्रह हासिल करना चाहता है. अंतरिक्ष से जुड़ी तकनीक में भूटान काफ़ी पीछे है. इसलिए साउथ एशिया सैटेलाइट का उसे बड़ा फ़ायदा होने जा रहा है.स्पेस टेक्नोलॉज़ी में बांग्लादेश ने अभी कदम रखने शुरू किए ही हैं. साल के अंत तक वह अपना ख़ुद का बंगबंधु -1 कम्युनिकेशन सैटेलाइट छोड़ने की तैयारी में है. श्रीलंका 2012 में चीन की मदद से अपना पहला संचार उपग्रह लॉन्च कर चुका है. उसने चीन की मदद से सुप्रीम सैट उपग्रह तैयार किया था. लेकिन साउथ एशिया सैटलाइट से उसकी क्षमताओं में इजाफा होगा.स्पेस टैक्नोलॉजी के नाम पर मालदीव्स खाली हाथ है. ऐसे में साउथ एशिया सैटलाइट के जरिए उसे मिली मदद बेहद फायदेमंद साबित होगी.

एजेंसी न्यूज़

जाने कहां तैयार हुई है उड़ने वाली कार? कितनी तेज़ चलती है ये?

अभी तक उड़ने वाली कारें साइंस फ़िक्शन का ही विषय हुआ करती थीं. दशकों तक वैज्ञानिक इसे हकीक़त में उतारने की कोशिश करते रहे हैं. लेकिन पुर्तगाल की एक स्टार्ट-अप कंपनी ने इसे ज़मीन पर उतारने में सफ़लता हासिल की है और जल्द ही इसके लॉन्चिंग की तैयारी है. कंपनी ने इसका परीक्षण किया है. इसमें हवाई और सड़क यातायात के नियमों का ध्यान भी रखा गया है. इस कार में विमान की तरह तीन पहिए लगे हैं. इसके ऊपर हेलिकॉप्टर की तरह दो ब्लेड वाला फोल्डिंग पंखा है जो कार को ऊपर लिफ़्ट करता है. और पीछे की ओर प्रोपेलर लगे हैं जो इस कार को हवा में आगे की ओर रफ़्तार देते हैं. सुरक्षा की दृष्टि से इसमें 100 हॉर्स पॉवर के दो इंजन लगे हुए हैं. यह कार हवा में 177 किलोमीटर प्रति घंटा और सड़क पर 161 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती है. इसे सड़क से हवा में जाने में 10 मिनट का समय लगता है. इस कार में पायलट समेत दो लोगों के बैठने की जगह है. इसको चलाने के लिए आपके पास पायलट लाइसेंस होना चाहिए और कम से कम 25 घंटे उड़ान का अनुभव होना चाहिए. इसके बेसिक मॉडल की क़ीमत है चार लाख डॉलर (क़रीब 2.57 करोड़ रुपये)